सतावर SATAVAR

             सतावर SATAVAR


सतावर भारत में पाई जाने वाली एक औषधीय वनस्पति है। चरक और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में सतावर का वर्णन बहुत मूल्यवान  जड़ी बूटी के रूप में किया गया है। प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में कई आयुर्वेदाचार्यो ने इसके बारे में यहां तक लिखा है कि यह इतनी दिव्य औषधि है कि यदि विधिपूर्वक इसका सेवन किया जाए तो शरीर के अनेकों रोगों को समाप्त किया जा सकता है।  कई प्रकार की अन्य आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण में भी इसका प्रयोग किया जाता है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी अधिक डिमांड होने की वजह से भारत में इसकी खेती पर बहुत बल दिया जा रहा है। हिमालय की तराई में इसके पौधे अधिक मात्रा में मिलते हैं। परंतु आजकल खेती के रूप में पूरे भारतवर्ष में इसे उगाया जाता है। यह एक बेल नुमा पौधा होता है। सतावर की जड़ में लंबे और सफेद कन्द होते हैं, यह लंबे कन्द  ही सतावर के नाम से बाजार में बिकते हैं जिनसे औषधियां तैयार की जाती है। यह आसानी से किसी भी पंसारी की दुकान पर मिल जाता है। भारत में कई बड़ी आयुर्वेदिक कंपनियां भी इसको पाउडर के रूप में बिक्री करती है।

सतावर के गुण --- आयुर्वेदिक ग्रंथों में आयुर्वेदाचार्यो ने शतावर का बहुत गुणकारी औषधि के रूप में वर्णन किया है। शतावर एक गुरू,शीत और तिक्त रसायन है। यह अग्निवर्द्धक, बुद्धिवर्द्धक होने के साथ साथ दुर्बलता को दूर करने वाली औषधि है। यह वीर्य का शोधन करके विकारो को नष्ट करके बलशाली बनाती है। यह है इतनी दिव्य औषधि है कि यदि कोई रोगी ज्यादा कमजोर हो गया है तो इसके सेवन से उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है, और उसके शरीर में एक नई शक्ति का संचार होता है। इसके सेवन से स्त्रियों के स्तनों में दूध बढ़ता है, और शक्ति वर्धक होती है।


सतावर के औषधीय प्रयोग ---

(1) अनिद्रा में सतावर का  प्रयोग --- दूध में चावल के साथ सतावर डालकर खीर पका ले, इस खीर को रात को सोते समय सेवन करने से अनिद्रा रोग समाप्त हो जाता है और नींद अच्छे से आती है।

(2) रतौंधी रोग मे सतावर का प्रयोग --- लगातार 15 दिन तक देसी घी में बने हुए सतावर के पत्तों का साग पका कर खाने से रतौंधी जैसे रोग में आश्चर्यजनक लाभ मिलता है।

(3) मस्तक पीड़ा में सतावर का प्रयोग --- 500 ग्राम शुद्ध तिल के तेल में 120 ग्राम शतावर डालकर तेल को उबालकर फिर छानकर कांच की शीशी में भरकर रख लें। इस तेल को मस्तक पर मालिश करने से मस्तक-पीड़ा और आंधा-शीशी जैसे रोग समाप्त हो जाते हैं।

(4) पित्त के रोगों में सतावर का प्रयोग --- 2 ग्राम सतावर के चूर्ण के साथ समान मात्रा में शहद मिलाकर दिन में तीन बार 10 दिन तक सेवन करने से पित्त संबंधित सभी रोग जैसे अम्लपित्त, हाथ पैरों में जलन, दाह, शूल आदि समाप्त हो जाते है।

(5) दुग्ध वृर्द्धि में सतावर का प्रयोग --- 4 ग्राम सतावर के चूर्ण को दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से स्त्री के स्तनों में दूध की वृद्धि होती है और स्तन में दुग्ध संबंधी अन्य रोग भी समाप्त हो जाते हैं।

(6) रक्त अतिसार में सतावर का प्रयोग --- 2 ग्राम की मात्रा में सतावर के चूर्ण को गाय के कच्चे दूध के साथ दिन में दो या तीन बार सेवन करने से रक्त अतिसार  में लाभ मिलता है।

(7) मूत्रकृच्छ --- 1 लीटर पानी में 40 ग्राम शतावर और समान मात्रा में गोखरू का चूर्ण डालकर उबालें जब पानी आधा शेष रह जाए तो उसमें मधु और मिश्री मिलाकर दिन में 4 बार थोड़ा-थोड़ा करके पिलाने से मूत्र की रुकावट और मूत्र दाह रोग समाप्त हो जाते हैं।

(8) पथरी के रोग में सतावर का प्रयोग --- 1 लीटर पानी में 20 ग्राम सतावर और समान मात्रा में गोखरू डालकर उस पानी को उबालें और जब पानी आधा शेष रह जाए तो उसे ठंडा करके सुबह खाली पेट पीने से पथरी का रोग अवश्य ही समाप्त हो जाता है।

(9) लिकोरिया रोग में सतावर का प्रयोग --- गाय के दूध के साथ 2 ग्राम सतावर का चूर्ण सुबह खाली पेट सेवन करने से  लिकोरिया जैसा रोग समाप्त हो जाता है।

(10)  प्रमेह में  सतावर का प्रयोग --- गाय के दूध के साथ 2 से 4 ग्राम सतावर का चूर्ण सुबह-शाम 40 दिन सेवन करने से प्रमेह जैसा रेग समाप्त हो जाता है। परंतु इसमें विशेष ध्यान रखने योग्य बात यह है कि इस प्रयोग को करते समय चाय, कॉफी, खट्टा, गर्म चीजें आदि का परहेज रखें।

(11) शीघ्रपतन में सतावर का प्रयोग --- 2 ग्राम सतावर चूर्ण के साथ समान मात्रा में कोच के बीज का चूर्ण मिलाकर रात को सोते समय 45 दिन तक दूध के साथ सेवन करने से शीघ्रपतन जैसा रोग समाप्त हो जाता है और वीर्य गाढ़ा हो जाता है। जब तक औषधि का प्रयोग करें तब तक ब्रह्मचर्य का पालन करने से औषधि के अच्छे परिणाम मिलते हैं।









Comments

Popular Posts

आधुनिक युग में आयुर्वेदिक चिकित्सा कीआवश्यकता, आज के युग में आयुर्वेद का महत्व,

Mal Kangni ke fayede in hindi मालकांगनी ( ज्योतिषमति) के फायदे

Aloevera benefits in Hindi धृतकुमारी ALOEVERA