अजवायन AJVAYAN, अजवायन के फायदे

अजवायन AJVAYAN

अजवायन है कई रोगों में रामबाण औषधि

अजवायन एक औषधीय वनस्पति है। इसका उपयोग मसाले के रूप मे भोजन के स्वाद को बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी उत्तम माना जाता है। आयुर्वेद में कई प्रकार की औषधियों में अजवायन का उपयोग होता है। अकेले अजवायन से ही कई प्रकार के रोगों का निवारण किया जा सकता है। इसमें अग्नि दीपन कटुपौष्टिक और वायुनाशक गुण पाए जाते हैं इसलिए यह कई प्रकार के अन्न को पचाने में सक्षम है। यदि दूध, घी, मिष्ठान जैसे पौष्टिक आहार का पाचन नहीं हो पाए तो उनके खाने के बाद यदि थोड़ी अजवायन ग्रहण कर ली जाए तो ऐसे खाद्य पदार्थों को आसानी से पचाया जा सकता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से औरत के बच्चा होने के बाद अजवाइन के लड्डू खाने के लिए दिए जाते हैं इससे गर्भाशय की शुद्धि होकर उसकी पीड़ा दूर होती है। कामेच्छा( संभोग करने की इच्छा) की कमी को दूर करने के लिए अजवाइन बहुत उपयोगी मानी जाती है।  क्योंकि इसमें उत्कृष्ट कामोद्दीपक गुण पाए जाते है।
                 
          विश्व के कई देशों में इसकी खेती की जाती है। मुख्यतः भारत, ईरान, इराक और पाकिस्तान आदि में इसकी खेती अधिक मात्रा में की जाती। भारत में इसकी खेती मुख्यतः उत्तरप्रदेश, बिहार, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में की जाती है।
 
             अजवाइन में एक  सुगंधित उड़नशील द्रव्य पाया जाता है। इसके बीजो मे फाइबर, खनिज, विटामिन और ऐंटिआक्सिडेंट के गुण पाए जाते है। इनमे जीवाणुओं और कीटाणुओं से लड़ने की शक्ति होती है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए अजवाइन के बीच उत्तम माने  माने जाते हैं।


अजवायन के औषधीय गुण 

(1) सर दर्द और सर्दी जुखाम में अजवायन का प्रयोग --- लगभग 100 ग्राम अजवायन लेकर उसको मलमल के कपड़े में पोटली बांधकर तवे पर गर्म कर लें और उसे फिर नस्य ले अर्थात नाक से सूंघ ले इससे बंद नाक और सर्दी जुखाम में आराम मिलता है। और सर दर्द में भी आराम हो जाता है। 
अथवा अजवाइन को पीसकर बारीक चूर्ण कर लें और उसे नाक में सूंघने से सर-दर्द, सर्दी-जुकाम आदि रोगों में लाभ मिलता है और मस्तिष्क कृमि रोग समाप्त होता है।

(2) खासी में लाभदायक है अजवायन का चूर्ण ---  2 से 4 ग्राम की मात्रा में अजवायन के चूर्ण को गर्म पानी या दूध से दिन में दो बार ग्रहण करने से खांसी के रोग में लाभ मिलता है।

(3) कान के दर्द में अजवायन का प्रयोग -- 10 ग्राम अजवायन ले और उसे 50 ग्राम तिल के तेल में पका लें इस तेल की कुछ बूंदें कान में डालने से कान के दर्द में आराम मिलता है और कान के अन्य रोगों में भी लाभ होता है।

(4)अजवायन के सेवन से पेट के कीड़ो का नाश ---(i) लगभग 3 ग्राम अजवायन का चूर्ण दिन में दो बार छाछ के साथ सेवन करने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं। और बार-बार कृमि रोग होने से छुटकारा मिल जाता है।
(ii) 2 ग्राम अजवाइन चूर्ण के साथ समान मात्रा में सेंधा नमक मिलाकर गुनगुने जल के साथ सेवन करने से पेट के कृमि रोग में लाभ मिलता है। और अजीर्ण, आमवात और उधर सूल रोग  मे अवश्य ही लाभ मिलता है।
(iii)  अजवाइन के पत्तों का स्वरस दिन में दो बार दो (2) ग्राम की मात्रा में देने से छोटे बच्चों के पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।

(5) उदर विकार में अजवायन का प्रयोग --- अजवायन, हरण, सोठ और सेंधा नमक सम मात्रा मे लेकर पीस कूट कर बारीक चूर्ण तैयार कर ले।  2 से 4 ग्राम की मात्रा में गर्म जल  के साथ लेने से उदर संबंधित सभी विकार नष्ट होते हैं।

(7) मंदाग्नि और अम्ल पित्त में लाभदायक है अजवायन -- अजवायन 80 ग्राम, सेंधा नमक 40 ग्राम, काला नमक 40 ग्राम, काली मिर्च 40 ग्राम, जवाखार 40 ग्राम, कच्चे पपीते का दूध 10 ग्राम इन सभी को पीस लें और इनके साथ 1 किलो ग्राम नीबू का रस मिलाकर कांच के बर्तन में डाल कर धूप में रख दें। और बीच-बीच में हिलाते रहें। एक महीने बाद जब यह बिल्कुल सूख जाए तो चूर्ण बनकर तैयार हो जाता है।  2 से 4 ग्राम कीी मात्रा मे जल के साथ सेवन करने से मंदाग्नि, अजीर्ण, अम्लपित्त और संग्रहणी जैसे रोग समाप्त हो जाते हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है।
(8) बाय, गैस, पेटदर्द मे अजवायन का प्रयोग ---  (i)  अजवायन 10 ग्राम, छोटी हरड़ 6 ग्राम, सेंधा नमक 10 ग्राम और घी में भुनी हुई हींग 10 ग्राम लेकर इन सभी को कूट पीसकर चूर्ण तैयार कर ले। 2 ग्राम की मात्रा में जल के साथ सेवन करने से पेट दर्द, वायु गोला और गैस आदि रोगों में तुरंत लाभ मिलता है।
(ii) एक किलोग्राम अजवाइन और 1 किलोग्राम नींबू का रस के साथ 50 - 50 ग्राम की मात्रा में पांचो नमक मिलाकर एक कांच के बर्तन में धूप में रख दें, जब कुछ दिन बाद नींबू का रस सूख जाए तो यह औषधि बनकर तैयार हो जाती है। 1 से 4 ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार सेवन करने से उदर संबंधी सभी रोग समाप्त हो जाते हैं।
(3) डेढ़ किलोग्राम जल को लेकर  अच्छे से उबाल लें जब यह जल उबलते हुए सवा किलोग्राम रह जाए तो इसमें आधा किलो अजवाइन डाल  कर ढक्कन बंद कर दें। जब यह ठंडा हो जाए तो इसे छलनी से छान कर कांच के बर्तन में भरकर रख लें इस जल को 50 ग्राम की मात्रा में दिन मे दो बार सेवन करने से उदर संबंधित सभी रोगों में लाभ मिलता है।
(4) 125 ग्राम दही के मट्ठा में दो ग्राम पिसी हुई अजवाइन और एक ग्राम सेंधा नमक डालकर भोजन के साथ  सेवन करने से अपच, अफारा और गैस जैसे रोगों में लाभ मिलता है। अथवा भोजन के उपरांत एक गिलास छाछ में दो ग्राम पिसी हुई अजवाइन और एक ग्राम सेंधा नमक मिलाकर सेवन करना  पेट के लिए बहुत लाभदायक माना जाता है।

(9) बहुमूत्र रोग में अजवायन के फायदे --- (i) पिसी हुई अजवायन का चूर्ण और गुड सम मात्रा में मिलाकर उसकी एक-एक ग्राम की गोली बना लें और दिन में तीन-तीन घंटे के पश्चात एक-एक गोली का सेवन करने से बहुमूत्र जैसे रोग से छुटकारा मिल जाता है।
(ii) जो बच्चे रात को बिस्तर में पेशाब कर देते हैं उनको गुड़ के साथ अजवाइन का चूर्ण मिलाकर सेवन कराने से उनकी इस बीमारी से छुटकारा मिल जाता है।

(10) चर्म रोग को ठीक करती हैं अजवायन -- अजवायन को  पानी में डालकर उबाल लें और उसका काढ़ा तैयार कर ले। फिर इस काढ़े  से त्वचा को धोएं, ऐसा करने से त्वचा के चर्म रोग, दाद, खुजली आदि जैसे रोग समाप्त हो जाते हैं।

(11) मासिक धर्म की रुकावट में अजवायन का प्रयोग- 10 ग्राम अजवायन और 50 ग्राम गुड़ का काढ़ा तैयार कर ले। और इस काढ़े को सुबह-शाम सेवन करने से मासिक धर्म में आई रुकावटें समाप्त हो जाती है,और मासिक धर्म नियमित रूप से  आने लगता है।
(12) पुरुषत्व प्राप्ति के लिए अजवायन का प्रयोग  --- चार
ग्राम अजवाइन का चूर्ण और 10ml सफेद प्याज के रस के साथ शक्कर मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से 21 दिन में शीघ्रपतन, नामर्दी और स्वपनदोष मे अवश्य ही लाभ होता है। अथवा रात को सोते समय आधा किलो दूध में पाँच छुहारे उबालकर उसके साथ 5 ग्राम अजवाइन के चूर्ण का सेवन करने से काम उत्तेजना बढ़ जाती है और स्त्री प्रसंग में आनंद प्राप्त होता है।


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