उपवास, आयुर्वेद में 'उपवास' श्रेष्ठ उपचार विधि

                             

उपवास :-- आध्यात्मिक दृष्टि से "उपवास" शब्द का बड़ा व्यापक अर्थ समझा जा सकता है। परंतु यहां हमारे स्वास्थ्य की चर्चा हो रही है इसलिए हम यह जानेंगे कि स्वास्थ्य के लिए उपवास की हमे क्यों आवश्यकता है। सरल भाषा में उपवास का अर्थ यहां पर यह है कि जो हम रात दिन भोजन करते हैं उस भोजन को किसी दिन ग्रहण न कर के, सप्ताह में या महीने में एक दिन भूखा रहना, ताकि हमारे पाचनतंत्र को थोड़ा आराम मिले और वह पुनः नई ऊर्जा प्राप्त कर अपना कार्य सुचारू रूप से  करते हुए हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखें।


              शरीर की शुद्धि के लिए उपवास से बढ़कर कोई अन्य विधि नहीं है। वर्तमान समय में भागदौड़ भरी जिंदगी में हमें कब खाना है, क्या खाना है, और कैसे खाना है इस बात पर कोई ध्यान ही नहीं जाता । और परिणाम स्वरूप हमारा शरीर एक जर्जर मशीन की भाती खाने को पचाने में लगा रहता है। मशीन को भी काम के पश्चात कुछ समय का विश्राम दिया जाता है। यदि ऐसा न किया जाए तो मशीन शीघ्र ही खराब हो जाएगी तथा उसकी उपयोगिता समाप्त हो जाएगी। ठीक इसी प्रकार हमारी शारीरिक मशीन जो रात रात दिन भोजन को पचाने में लगी रहती है, उसे भी कुछ समय के लिए विश्राम चाहिए। ताकि वह पुनः नई ऊर्जा के साथ अच्छे से कार्य कर सकें। खाना तभी खाना चाहिए जब पेट में जोर की भूख लगी हो। इसलिए कहा जाता है कि भूख में चने भी बादाम लगते हैं।सूखी रोटी भी रस से भरी लगती है। भूख में खाने को देखते ही मुंह में लार टपकने लग जाती है। यदि भूख न हो तो स्वादिष्ट भोजन भी फीका लगता है, कुछ खाने को मन नहीं करता। यदि जबरदस्ती कुछ खा लिया जाए तो लाभ कम हानी अधिक होती है। असमय और भूख से अधिक भोजन करने से हमारी पाचन क्रिया पर जोर पड़ता है और हमारी वात पित्त कफ के दोष प्रभावित होते हैं। ऐसा करने से हमारी पाचन क्रिया खराब हो जाती है, और शरीर स्वस्थ हो जाता है। पुनः स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए उपचार के रूप में उपवास को एक उत्तम विकल्प माना जाता है।

उपवास की विधि :--- प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक शक्ति व मानसिक स्थिति अलग-अलग पाई जाती है। उपवास में अलग-अलग विधि अपनाई जा सकती है हम चाहे तो एक मास में एक बार उपवास रख सकते हैं। या सप्ताह में एक दिन उपवास रखकर उसका लाभ प्राप्त कर सकते हैं। अपने शारीरिक बल और स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह उपवास करना चाहिए। उपवास के दिन पूरे दिन भूखा रहना होता है। और उस दिन  केवल साबूदाना,जूस,फल जैसे हल्के खाद्य पदार्थ का ही सेवन करना चाहिए। पानी की जगह आप थोड़ा बहुत जूस या  नींबू पानी का भी प्रयोग कर सकते हैं। यदि भूख ज्यादा लगती है तो एक समय हल्का भोजन करके भी उपवास किया जा सकता है। एक समय का उपवास करते समय हम भोजन में मूंग की दाल और फुलके ले सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे यहां भोजन हमें भूख से एक चौथाई करना है।

उपवास के लाभ :--- (1) उपवास करने से हमारी पाचन क्रिया मजबूत होती है।
(2) कब्ज, गैस, एसिडिटी जैसे रोगों का  नाश होता है।
(3) यदि हल्का बुखार और सर दर्द है तो उपवास करने से उसमे लाभ मिलता है।
(4) उपवास करने से शरीर हल्का फुल्का हो जाता है और नई शक्ति का संचार होता है।
(5) विवाह शादी अथवा अन्य समारोहों में उल्टा सीधा खाने के पश्चात आठ एक दिन का उपवास करने से शरीर स्वयं ही विकार को बाहर कर देगा तथा कोई कष्ट नहीं होगा। अतः कहा जा सकता है कि उपवास रामबाण उपचार है।
(6) समय-समय पर यदि सही विधि से उपवास किया जाए तो हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। जिससे शरीर में रोग आने की संभावनाएं समाप्त हो जाती है।
(7) उपवास करने से शरीर में जमा विजात्तीय तत्व बाहर आते हैं ,और शरीर का शुद्धिकरण होता है। इससे हमारे पाचन क्रिया के कार्य करने की क्षमता बढ़ जाती है। और हमारा भोजन अच्छे से  पच  कर शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।


              
      

Comments

Popular posts from this blog

आधुनिक युग में आयुर्वेदिक चिकित्सा कीआवश्यकता, आज के युग में आयुर्वेद का महत्व,

वर्तमान समय में आयुर्वेद का स्वरूप और महत्व, भारत में आयुर्वेद के राष्ट्रीय स्तर के संस्थान

रोग क्यों वह कैसे होते हैं, रोगों के कारण