संतुलित आहार,Balanced Diet.

                          संतुलित आहार


जिस तरह किसी मशीन या गाड़ी को चलाने के लिए बिजली या तेल की आवश्यकता होती है, उसी तरह मनुष्य को जीवन निर्वाह हेतु ऊर्जा एवं शक्ति की आवश्यकता होती है। मनुष्य ऊर्जा या शक्ति संतुलित भोजन से प्राप्त करते हैं। संतुलित भोजन मनुष्य के शरीर में हो रही वृद्धि ,विकास ,स्वस्थ शरीर की सभी क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। हमारे शरीर को ठीक तरह से कार्य करने के लिए अनेक पोषक तत्वों की आवश्यकता पड़ती है। यह पोषक तत्व हमारे शरीर के विकास वृद्धि एवं स्वास्थ्य में सहायता करते हैं। संतुलित एवं पौष्टिक भोजन में विद्यमान पोषक तत्व है - विटामिन, वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेटस, खनिज लवण या  मिनरल्स  जल आदि।
                       भोजन के सभी पदार्थों में यह सारे तत्व इकट्ठे नहीं मिलते। जब भोजन में सभी तत्व उचित अनुपात में हो तभी शरीर के सभी अंग ठीक प्रकार से कार्य करते हैं। परंतु यदि इनमें से किसी एक तत्व की कमी भोजन में होगी तो उस तत्व ने जो काम शरीर के अंदर करना होता है वह नहीं हो पाएगा जिससे शरीर का विकास प्रभावित होगा।भोजन के तत्वों को हम शरीर में उनके भिन भिन कार्यों के अनुसार विभिन्न भागों में बांट सकते हैं। जैसे शरीर का निर्माण करने वाले प्रोटीन। शरीर में गर्मी पैदा करके शक्ति देने वाले कार्बोज तथा  क्षमता बढ़ाने वाले खनिज लवण होते हैं। इसलिए हमें उचित मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन,  खनिज लवण, पानी आदि का सेवन करना चाहिए जिससे हमारा शरीर स्वस्थ रह  सके।

संतुलित आहार का अर्थ :-  भोजन या आहार से मिलने वाले रासायनिक पदार्थ हमारे शरीर के विकास व वृद्धि के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इन तत्वों के अभाव में हमारे शरीर का पूर्ण विकास नहीं हो पाता। अतः संतुलित आहार वह आहार है  जिसमें पोषक तत्व जैसे प्रोटीन ,वसा ,विटामिन ,खनिज लवण, कार्बोहाइड्रेट्स, पानी आदि निर्धारित एवं पर्याप्त मात्रा में होते हैं। संतुलित आहार से  शरीर को ऊर्जा प्रदान होती है  और शरीर की कार्य क्षमता  भी बढ़ाती है।

(1)  प्रोटीन --  प्रोटीन एक कार्बनिक योगिक है जो कार्बन, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन व ऑक्सीजन का सम्मिश्रण है। प्रोटीन शरीर की वृद्धि और विकास में सहायक होने के साथ-साथ क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत करने में भी सहायक है। प्रोटीन से शरीर का निर्माण होता है और उससे ऊर्जा भी प्राप्त होती है। भोजन में प्रोटीन की कमी से न केवल शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है बल्कि शरीर का विकास भी बाधित हो जाता है। इसकी कमी से व्यक्ति के उत्साह या जोश में भी कमी आ जाती है।


प्रोटीन के प्रकार एवं प्राप्ति के स्रोत :-- हमारे खाद्य पदार्थों में प्रोटीन विभिन्न स्रोतों में पाए जाता हैं। मुख्यतः प्रोटीन दो प्रकार के होते हैं 'वनस्पति जन्य' प्रोटीन और 'पशु जन्य' प्रोटीन।
(i) वनस्पति जन्य प्रोटीन ----:- जो प्रोटीन वनस्पति से प्राप्त होती हैं, उसे वनस्पति जन्य प्रोटीन कहते हैं।वनस्पति प्रोटीन मूंगफली,सोयाबीन,मटर,दाले,गेहूं, बादाम,पिस्ता,काजू,अखरोट बाजरा आदि से प्राप्त होती है।
(ii) पशु जन्य प्रोटीन ---  जो प्रोटीन प्राणी जन्य अथवा पशुओं से प्राप्त होती है उसे पशु जन्य  प्रोटीन कहते हैं। ये प्रोटीन मांस, अंडे ,मछली,  दूध ,पनीर , दही आदि से प्राप्त होती है।

प्रोटीन के लाभ : -- (i) प्रोटीन हमारे शरीर के टूटे-फूटे सैलो (कोशिकाओं ) की मरम्मत करता है ।
(ii) यह शरीर के विकास में सहायक होता है।
(iii) यह हमारे शरीर में काम करने की शक्ति उत्पन्न करता है।
(iv) शरीर में तापमान बनाए रखता है।
(v) यह शरीर में गति करने वाले तत्वों का आना-जाना अपने नियंत्रण में रखता है।

प्रोटीन की हानियां : शरीर में प्रोटीन का संतुलित होना आवश्यक होता है। यदि शरीर में प्रोटीन की मात्रा अधिक या कम हो जाए तो उससे निम्नलिखित प्रकार की हानियां होती हैं।
(i)  प्रोटीन की अधिक मात्रा शरीर में होने से मोटापा आ जाता है।
(ii) इसकी अधिकता से शरीर के जोड़ों में दर्द होना शुरू हो जाता है।
(iii) प्रोटीन की अधिकता से गुर्दों पर बोझ पड़ने के कारण इनमें कई प्रकार की खराबी आ जाती है।
(iv) प्रोटीन की कमी से त्वचा खुरदरी व खुश्क हो जाती है।


(2) वसा (Fats) :-'वैज्ञानिक भाषा में 'वसा' शब्द का प्रयोग वसा एवं तेल दोनों के लिए ही किया जाता है। वसा (चर्बी) छूने में चिकनी होती हैं इसलिए  इसे चिकनाई भी कहा जाता है। यह पानी में अघुलनशील होते हैं और ये कार्बन हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन का सम्मिश्रण होते हैं।  यह भोजन को स्वादिष्ट बनाते हैं और शक्ति प्रदान करते हैं। 

वसा के प्रकार एवं प्राप्ति स्त्रोत -- हमारे खाद्य पदार्थों में वसा विभिन्न क्षेत्रों में पाया जाता है इनमें से मुख्यतः यह दो प्रकार के होते हैं वनस्पति जन्य वसा, प्राणी जन्य वसा।
(i) वनस्पति जन्य वसा ---:- प्राकृतिक संसाधनों अथवा वनस्पतियों से प्राप्त होने वाली वसा वनस्पति जन्य वसा कहलाती है। यह वनस्पति घी, सरसों, मूंगफली,सोयाबीन आदि के तेल एवं तिलहन आदि से प्राप्त होती है।
(ii)  प्राणी जन्य वसा ---:- यह वसा घी, दूध, मक्खन, पनीर मछली के तेल, अंडे और मांस आदि से प्राप्त होती है।
वसा के कार्य / लाभ - -: (1) वसा शरीर को ऊर्जा तथा मांसपेशियों को शक्ति प्रदान करती है ।
(iii) यह विटामिन 'ए', 'डी', 'ई' तथा 'के' को शरीर की आवश्यकता अनुसार संभाल कर रखती है।
(iv) यह त्वचा तथा बालों को चिकना बनाती है।
(v) यह शरीर के ताप को नियमित रखती है।
(vi) यह शरीर को सर्दी लगने से बचाती है और शरीर को पुष्ट बनाती है।
(vii) इससे आवश्यक वसीय अम्लों की प्राप्ति होती है तथा यह शरीर के अंगों को सुरक्षा प्रदान करने में सहायक होती है।

हानियां -  वसा की कमी या वृद्धि से होने वाली हानियां निम्नलिखित है :
(i) वसा की अधिक मात्रा से शरीर में मोटापा आ जाता है।
(ii) इसकी अधिक मात्रा से शरीर की पाचन शक्ति कमजोर पड़ सकती है।
(iii) वसा की अधिक मात्रा से शरीर में पथरी हो जाती है  और मधुमेह जैसे रोग उत्पन्न हो जाते हैं।
(iv) वसा की कमी से त्वचा शुष्क हो जाती है।
(v) इसकी कमी से शरीर में विटामिन की भी कमी आ सकती है।



(3) कार्बोहाइड्रेट्स ---:-  कार्बोहाइड्रेट्स को कार्बोज भी कहा जाता है इससे अभिप्राय कार्बनिक योगिक के उस समूह से है जिसमें तीन तत्वों जैसे कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन का सम्मिश्रण होता है। यह ऊर्जा के सस्ते प्राप्ति स्रोत माने जाते हैं। यह शरीर में शक्ति ऊर्जा तथा गर्मी पैदा करते हैं। यह मल निष्कासन में सहायक होते हैं। यह शरीर में जमा होकर जरूरत पड़ने पर शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं। यह आमाशय व आंतों की सफाई में भी सहायक है।

कार्बोहाइड्रेट के स्रोत ---- कार्बोहाइड्रेट्स चावल, गेहूं, आम, केला, ग्लूकोस, साग, मक्का, ज्वार, जो, बाजरा,चीनी, गुड़ शक्कर, आलू ,शकरकंदी ,खजुर आदि से मिलते हैं।

कार्य / लाभ -- (i) कार्बोहाइड्रेट्स शरीर में शक्ति एवं गर्मी पैदा करते हैं
(ii) यह शरीर की मांसपेशियों को मजबूत एवं सुदृढ़ बनाते हैं।
(iii) ये प्रोटीन एवं वसा की बचत में सहायता प्रदान करते हैं।
(iv) ये शरीर के ताप को सामान्य करने में सहायक होते हैं।
(v) ये भोजन को स्वादिष्ट बनाने में सहायक होते हैं।
(vi) ये आमाशय व आंतों की सफाई में भी सहायक होते हैं ।(vii) ये पाचन क्रिया में सहायक होते हैं।

हानियाँ -- (i) कार्बोहाइड्रेट्स की अधिक मात्रा से शरीर में मधुमेह जैसा रोग उत्पन्न हो सकता है।
(ii) इसकी अधिक मात्रा से शरीर में मोटापा जाता है।
(iii) कार्बोहाइड्रेट की कमी से जोड़ों में दर्द होने लगता है।
(iv) इसकी कमी से रक्त प्रवाह में रुकावट आ सकती है।
(v) इसकी कमी से आंतों की पूरी सफाई नहीं हो पाती और अमाशय में तेजाब तत्वों की वृद्धि से शरीर कमजोर हो जाता है।
(vi) इसकी कमी से शरीर में अम्लता की मात्रा बढ़ जाती है।
(vii) इसकी कमी से त्वचा रोग ,हृदय रोग आदि हो जाते हैं।


(4) विटामिन :-- हमारे शरीर को प्रोटीन, वसा,  कार्बोहाइड्रेट्स और खनिज लवणों के साथ कुछ अन्य रासायनिक तत्वों की भी जरूरत होती है जिन्हें विटामिन कहा जाता है। विटामिन  उत्प्रेरक के रूप में शरीर की अनेक प्रक्रिया में भाग लेते हैं। यह हमारे शरीर को ऊर्जा शक्ति प्रदान करते हैं।w और शरीर को अनेक रोगों से बचाने में सहायक होते हैं। इसलिए उन्हें सुरक्षात्मक तत्व, जीवन तत्व आदि भी कहा जाता है।


विटामिनों के प्रकार  ---  घुलनशीलता के आधार पर विटामिनों को निम्नलिखित दो वर्गों में बांटा जा सकता है -
(i) वसा में घुलनशील विटामिन  -- जो विटामिन जल में न घुलकर वसा में सरलता से घुल जाते हैं उन्हें वसा में घुलनशील विटामिन कहते हैं जैसे 'ए', 'डी' और 'के' आदि विटामिन वसा में घुल जाते हैं।
(ii) जल में घुलनशील विटामिन ---   जो विटामिन वसा या चर्बी आदि में न घुल कर  पानी में सरलता से घुल जाएं उन्हें जल में घुलनशील विटामिन कहते हैं जैसे विटामिन 'बी कांपलेक्स" और विटामिन 'सी' पानी में घुल जाते है।

विटामिन 'ए' ( vitamin A )  ---
प्राप्ति के साधन -- विटामिन 'ए' मक्खन, पनीर, अंडे की जर्दी, दूध, दही, मछली के तेल, मटर, पालक, केला, संतरा, अनानास, गाजर, पपीता आदि में पाया जाता है।

कार्य / लाभ -- (i) विटामिन 'ए' आंखों की ज्योति में वृद्धि करता है।
(ii) यह अस्ति पिंजर को मजबूत करने मे सहायक होता है।

हानियाँ -- (i) विटामिन 'ए' की कमी से आंखों के रोग जैसे रतौंधी (नाइट ब्लाइंडनेस) हो जाते हैं।
(i) इसकी कमी से गुर्दे में पथरी बनने की संभावना अधिक हो जाती है।
(iii) इसकी कमी से त्वचा सख्त और खुरदरी हो जाती है और फेफड़े कमजोर हो जाते हैं।

विटामिन 'बी'---: विटामिन 'बी' कई प्रकार के विटामिनों का सम्मिश्रण है।  इस कारण  यह विटामिन "बी कांपलैक्स" के नाम से जाना जाता है। इसमें विटामिन b1, B2 और,B12 आदि शामिल होते है।
प्राप्ति के साधन -- विटामिन 'बी' गेहूं,आटे,  खमीर, मछली, अंडे, मांस, दूध, पनीर, खजूर, अंगूर, शलगम, रसदार फलों आदि में पाया जाता है।

कार्य / लाभ --- (i) विटामिन 'B' मांसपेशियों हड्डियों व स्नायु को मजबूत करते हैं।
(ii) यह चरम रोग से रक्षा करते हैं।
(iii) इनसे  हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
(iv) कब्ज को दूर करते हैं और भोजन को पचाने में सहायता करते हैं ।

हानियाँ --  (i) विटामिन 'बी' की कमी से भूख नहीं लगती और शरीर का भार कम होने लगता है।
(ii) इनकी कमी से बेरी- बेरी ,रक्त की कमी, जीभ पर छाले पड़ना आदि रोग हो जाते हैं।:
(iii)  इनकी कमी से पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है।

विटामिन 'सी' ---:   प्राप्ति के साधन -- विटामिन 'सी' रसदार व खट्टे फलों में पाया जाता है ; जैसे नीब, आंवला, संतरा, अनानास, माल्टा, मोसम्मी आदि। इसके अतिरिक्त यह हरी पत्तेदार सब्जियों जैसे बंद गोभी, पालक, सरसों का साग, शलगम, टमाटर आदि में भी पाया जाता है।

कार्य /लाभ ---  (i) विटामिन 'सी' से रक्त नलिया ठीक रहती है,और यह रक्त को साफ करने में सहायक होता है।
(ii) यह दांतों के मसूड़ों को मजबूत करता हैं।
(ii) यह घावों और टूटी हड्डियों को जल्दी ठीक करता है।

हानियां ---  (i) विटामिन 'सी' की कमी से स्कर्वी नामक रोग और दांतों में पायरिया रोग हो जाता है।
(ii) इसकी कमी से हड्डियां कमजोर होने लगती है और मसूडो से रक्त बहने लगता है।
(iii) शारीरिक एवं मानसिक थकान रहने लगती है।


विटामिन 'डी' ---  प्राप्ति के साधन -- :  अंडे की जर्दी, मछली का तेल, दूध, घी, मक्खन आदि में अधिक मात्रा में पाया जाता है। विटामिन 'डी' सूर्य की किरणों से स्वयं ही शरीर में पैदा होता रहता है।

कार्य / लाभ --- (i) विटामिन 'डी' हड्डियों और दांतों को मजबूत करता है।
(ii) यह शरीर में फास्फोरस और कैल्शियम अम्ल को पचाने का कार्य करता है।
(iii) यह बच्चों के विकास के लिए बहुत आवश्यक है।


हानियाँ ---  (i) विटामिन 'डी' की कमी से बच्चे रिकेट्स नामक रोग का शिकार हो जाते हैं।
(ii) इसकी कमी से शरीर विकास रूक जाता है और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।
(iii) इसकी कमी से मिर्गी और सोकड़ा  जैसे रोग हो जाते हैं। (iv) इसकी कमी से सिर के बाल सफेद होने लगते हैं।

विटामिन 'ई' ---- प्राप्ति के साधन -:  विटामिन 'ई' चने की दाल,दलिया, तेलों, अंडे की जर्दी, बादाम, पिस्ता,गेहूं,शहद, बंद गोभी, गाजर, सलाद, मटर, प्याज, फूलगोभी, अंकुरित बीजो आदि में पाया जाता है।
कार्य /लाभ  -- (i) विटामिन 'ई' नपुसंकता और बांझपन को रोकता है।
(ii) यह जनन संबंधी अंगों के विकास में सहायक होता है।

हानियाँ ----(i) विटामिन 'ई' की कमी से शरीर पर फोड़े फुंसी निकल आती है।
(ii) इसकी कमी से पुरुषों में  नपुसंकता और स्त्रियों में बांझपन  हो जाता है।
(iii)  इसकी कमी से गर्भपात भी हो सकता है।

विटामिन 'के' ----  प्राप्ति के साधन --:  विटामिन 'के' हरी सब्जियों जैसे पालक, सरसों का साग,मेथी, बंद गोभी, टमाटर, अंडे की जर्दी, सोयाबीन, तथा मछली, आलू, मांस आदि से प्राप्त होता है।
कार्य / लाभ  ----- (i) विटामिन 'के' (k)  जख्मों से बह रहे रक्त को रोकता है अर्थात यह रक्त का थक्का जमाने में सहायक होता है।
(ii) यह त्वचा के रोगों से शरीर की रक्षा करता हैं।

हानियाँ ---  (i) विटामिन 'के' की कमी से एनीमिया हो जाता है।
(ii) इसकी कमी से जख्मों से बहता रक्त जलदी बंद नहीं होता।


(5) खनिज लवण ----:- हमारे भोजन के आवश्यक तत्व में खनिज लवणों का विशेष महत्व है हमारे शरीर में लगभग 4 % खनिज लवण है। खनिज लवणों को रक्षात्मक भोज्य पदार्थ माना जाता है। हमारे शरीर के आवश्यक खनिज लवण है कैल्शियम, फास्फोरस, सोडियम, सल्फर, लोहा, मैग्नीशियम, तांबा, आयोडीन, क्लोरीन, पोटैशियम, गंधक आदि है।


कैल्शियम  और  फासफोरस ---:-- प्राप्ति के साधन ---  कैल्शियम और फास्फोरस दूध, दही, पनीर,मछली,अंडे, हरी सब्जियों, गेहूं का दलिया, दालों, सोयाबीन, बादाम, मूंगफली, ताजे फलों आदि से प्राप्त होते हैं।

लाभ /कार्य  -----:-   (i) कैल्शियम और फास्फोरस दांतों और हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं।
(ii) यह दिल और दिमाग के लिए बहुत लाभदायक होते हैं। यह शरीर के  विकास में सहायक होते हैं।
(iii) यह अमल क्षार के संतुलन को बनाए रखने में भी सहायक होते हैं।

कैल्शियम और फास्फोरस की कमी से होने वाले रोग --:- (i)कैल्शियम और फास्फोरस की कमी से शरीर की हड्डियां  और दांत कमजोर हो जाते हैं।
(ii) इनकी कमी से  दिमागी कमजोरी और थकावट महसूस होने लगती।

सोडियम ---:-  प्राप्ति के साधन ---- सोडियम मूली, आलूबुखारा, गाजर, भिंडी, शलगम, नारियल, आदि में मिलता है।
लाभ -- (i) सोडियम से भोजन स्वादिष्ट बनता है।
(ii) यह भोजन पचाने में सहायक होता है और शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने में भी सहायक होता है।
(iii) यह रक्त प्रवाह में सहायक होता है।
(iv) यह अमल एवं क्षार के संतुलन को बनाए रखने में भी सहायक होता है।

हानियां ----  (i) सोडियम की कमी से शारीरिक वृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
(ii) इसकी कमी से उच्च रक्तचाप,गुर्दे की बीमारी आदि हो जाती है।

लोहा -- -:  प्राप्ति के साधन ----- लोहा साग, मेथी, पुदीना, आलू, गाजर, सोयाबीन, केला आदि में पाया जाता है।
लाभ ---- (i) हमारे शरीर में रक्त के लाल रक्त अणुओं का निर्माण करता है।
(ii) यह रक्त को साफ करता है।

हानियां ----(i) लोहे की कमी से रक्त के लाल रक्ताणु  कम हो जाते हैं।
(ii) इसकी कमी से अरक्ता रोग हो जाता है।


पोटेशियम -- -:  प्राप्ति के साधन --- पोटेशियम आलूबुखारा, मूली, करेला, बंद गोभी, शलगम, नींबू, नाशपाती, और नारियल आदि से मिलता है।
लाभ -----  (i) इसके द्वारा जिगर और हृदय को ताकत मिलती है।
(ii) इससे कब्ज दूर होती है।
(iii) इससे घाव शीघ्र ठीक हो जाते हैं।

हानिया --- (i) पोटेशियम की कमी से मांसपेशियां कमजोर हो जाती है।
(ii) इसकी कमी से शरीर में फुर्तीलापन नहीं रहता।
(iii) इसकी कमी से एडिक्शन रोग हो जाता है।

आयोडीन -----: प्राप्ति के साधन --- *आयोडीन' दूध, पालक, लहसुन, प्याज, टमाटर,  समुद्री नमक, समुद्री मछली, आदि से मिलता है।
लाभ  --- (i) आयोडीन से गले की ग्रंथियों में रस बनता है जो शरीर का भार व शक्ति बढ़ाने में सहायक होता है।
(ii) यह थायराइड ग्रंथि की क्रियाशीलता के लिए बहुत  आवश्यक है।

हानियां  ----  (i) आयोडीन की कमी से शरीर में घेंघा रोग हो जाता है।
(ii) इसकी कमी से त्वचा मोटी और खुरदरी हो जाती है।

मैग्नीशियम ---- प्राप्ति के साधन --- 'मैग्नीशियम ' संतरा, आलूबुखारा,गेहूं, पालक, टमाटर, काकडी, आदि में पाया जाता है।
लाभ ---- (i) मैग्नीशियम हमारे शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करता है और लचीला बनाता है।
(ii) यह चर्म रोगों से हमारे शरीर की रक्षा करता हैं।

हानियां --- (i) मैग्नीशियम की कमी से कब्ज या दस्त आदि रोग हो जाते हैं।
(ii) इसकी कमी से चेहरे पर झुरिया  पड़ जाती है।

क्लोरीन ----: "क्लोरीन" नमक, पालक, गाजर, बंद गोभी, टमाटर, प्याज आदि में अधिक मात्रा में पाया जाता है।
लाभ ---- (i) क्लोरीन शरीर से व्यर्थ पदार्थों को बाहर निकालने में सहायता करता है।
(ii) यह चर्बी घटाने में सहायक होता है।
(iii) यह पानी के जीवाणुओं को नष्ट करने में सहायक होता है।

हानि --: क्लोरीन की कमी से  अमावस्य कमजोर हो जाता है।



(6) जल  ---: जल हमारे जीवन का आधार है। इसके बिना जीवन संभव नहीं है। हमारे जीवन में लगभग 66%  जल है। जल ऑक्सीजन और हाइड्रोजन का समिश्रण है। यह हमें नहरो, नदियों, और झीलों, झरनों,  नलो व तालाबों आदि से मिलता है। वर्षा आदि से भी हमें जल की प्राप्ति होती है।


लाभ / कार्य व आवश्यकता ---: अच्छे स्वास्थ्य हेतु हमें प्रतिदिन 6 से 10 गिलास पानी के पीने चाहिए। जल के कार्य निम्नलिखित है।
(i) जल शरीर के प्रत्येक भाग में खुराक पहुंचाता है। और शरीर से व्यर्थ पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक होता है। (ii) यह रक्त बनाने में सहायता करता और रक्त प्रवाह को बनाए रखने में भी सहायक होता है।
(iii) यह खाने को घोल बनाकर पचाने में मदद करता है।
(iv) शरीर के तापमान को नियमित रखता है।
(v) यह  सभी जोड़ों को ठीक ढंग से काम करने में मदद करता है।
(vi) यह भोजन को पचाने में सहायक होता है।
(vii) यह शरीर की कोशिकाओं के निर्माण में भी सहायक होता है।

जल की कमी से होने वाली हानियां ----   (i) जल की कमी से आमाशय भारी रहता हैं।
(ii) जल की कमी से व्यर्थ पदार्थ शरीर से बाहर नहीं निकल पाते जिससे शरीर कमजोर हो जाता है।
(iii) इसकी कमी से भोजन नहीं पचता और कब्ज रहने लगती है।
(iv) जोड़ों में दर्द रहने लगता है तथा जल्दी थकावट महसूस होती है।
(v) जल कम पीने से भूख कम लगती है।
(vi) इसकी कमी से गुर्दो में कई बीमारियां पैदा हो जाती है।
(vii) इसकी कमी से निर्जलीकरण हो जाता है।
(viii)इसकी कमी से उत्सर्जन संस्थान के अंगों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
(ix)  इसकी कमी से मृत्यु तक भी हो सकती है।

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